APPRECIATIONS

डॉ सरला शुक्ला

पूर्व अध्यक्ष , हिंदी विभाग , लखनऊ विश्वविद्यालय


"बक्शी दीदी की काव्य ध्वन्यात्मकता एवं गतिशील प्रवाह उनके काव्य की विशेषता है। प्रकृति प्रेम आध्यात्मिक विचारधारा सर्वत्र लक्षित होती है। उनकी कविताओं में नाटक एवं कथा- कहानी का अद्भुत समावेश है जो आश्चर्य जनक है। उदाहरण के लिए  उनकी कविता मानव और मृत्यु की छाया। "

श्रीमती शीला मिश्रा

आकाशवाणी , लखनऊ


" श्रीमती स्वरूप कुमारी बक्शी के लिखे हुए नाटक हास्य नाटक होते हुए भी पूर्ण रूप से जीवन-दर्शन पर आधारित हैं । ग्रंथावली के नाटक श्रव्य तथा दृश्य दोनों ही हैं । लगभग सभी नाटक आकाशवाणी से प्रसारित हो चुके हैं । नाटकों का विषयवस्तु प्रतिदिन के जीवन से ली गयी है। पात्रों का चुनाव भी चरित्र के अनुसार ही किया गया है। कथोप कथन और संवाद भी चुटीले हैं। इन चुटीले व्यंग्यों के अतिरिक्त संवाद की भाषा कहीं - कहीं साहित्यिक भी है जो लेखिका की साहित्यिक रुचि का परिचय कराती चलती है। संक्षेप में नाटकों का यह खंड अति रोचक है। "

डॉ सूर्य प्रसाद दीक्षित

पूर्व अध्यक्ष , हिंदी विभाग , लखनऊ विश्वविद्यालय


" स्वरूप कुमारी बक्शी ने अपने नाटकों में हास्य और व्यंग्य के द्वारा समाज की कुरीतियों एवं विषमताओं पर प्रकाश डाला है। उनका व्यंग्य कभी विद्रोह, कभी विनोद, कभी वेदना का स्वरूप ले लेता है। "

डॉ शरण बिहारी गोस्वामी , Dt: 29. 4 . 1999

पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष , उ.प्र हिंदी संस्थान


" आत्मा के सहज तत्व को सरल भाषा में व्यक्त करके बक्शी दीदी ने अपनी रचनाओं में आत्म दीप्ति द्वारा सौंदर्य प्रदान किया है। उनकी हर पंक्ति में उपनिषद् है। अपितु उनका सम्पूर्ण साहित्य उपनिषदों के दर्शन की प्रेरणा से व्याप्त है। वे संत हैं , ऋषिका हैं। "